गुरुवार, 18 अगस्त 2022

नज़्म-4/ नॉस्टेल्जिया



नॉस्टेल्जिया

वो जब नाराज़ होती थी
तो अपने गार्डन में जा के मुझको फ़ोन करती थी
सताने के लिए मुझको
वो कहती थी
बहुत बनने लगे हो तुम
मज़ा तुमको चखाऊँगी
तुम्हारी वो जो गुड़िया है मेरे अंदर
मैं उसकी उँगलियों में सैकड़ों कांटे
चुभाऊँगी
रुलाऊँगी
मैं कहता था अगर तुमने
मेरी प्यारी सी गुड़िया को
सताया तो
रुलाया तो
क़सम से मैं
तुम्हारा वो जो बाबू है मेरे अंदर
मैं उसकी जान ले लूँगा...!!

11 जनवरी, 2016

बुधवार, 17 अगस्त 2022

नज़्म-3/ तख़्लीक़


तख़्लीक़

वो मुझसे कहती थी
मेरे शायर !!
ग़ज़ल सुनाओ
जो अनसुनी हो
जो अनकही हो
कि जिसके अहसास अनछुए हों

हों शेर ऐसे
कि पहले मिसरे को सुन के मन में
खिले तजस्सुस का फूल ऐसा
मिसाल जिसकी अदब में सारे कहीं भी ना हो

मैं उससे कहता था मेरी जानां !!
ग़ज़ल तो कोई ये कह चुका है
ये मोजिज़ा तो खुदा ने मेरे दुआ से पहले ही कर दिया है

तमाम आलम की सबसे प्यारी
जो अनकही सी
जो अनसुनी सी
जो अनछुई सी
हसीं ग़ज़ल है-
'वो मेरे पहलू में जल्वा-गर है'

14 जनवरी 2016