शनिवार, 13 अगस्त 2022

ग़ज़ल-1/ दरो-दीवार रौशन हैं...दरीचा मुस्कुराता है

दरो-दीवार रौशन हैं...दरीचा मुस्कुराता है

अगर मौजूद हो माँ घर में क्या क्या मुस्कुराता है


किया नाराज़ माँ को और बच्चा हँस के यह बोला

कि ये माँ है मियाँ इसका तो ग़ुस्सा मुस्कुराता है


हमारी माँ ने सर पर हाथ रखकर हमसे यह पूछा

कि किस गुड़िया की चाहत में ये गुड्डा मुस्कुराता है


सभी रिश्ते यहाँ बर्बाद हैं मतलब परस्ती से

अजल से फिर भी माँ-बेटे का रिश्ता मुस्कुराता है


फ़रिश्तों ने कहा- "आमाल का संदूक क्या खोलें?"

दुआ लाया है माँ की इसका बक्सा मुस्कुराता है


लगाया था किसी ने आँख से काजल छुटा कर जो

मेरे बचपन के अल्बम में वो टीका मुस्कुराता है


दिया था उन को हामिद ने कभी ला कर जो मेले से

अमीना की रसोई में वो चिमटा मुस्कुराता है


किताबों से निकल कर तितलियां ग़ज़लें सुनाती हैं

टिफ़िन रखती है मेरी माँ तो बस्ता मुस्कुराता है


वो उजला हो कि मैला हो या महंगा हो कि सस्ता हो

ये माँ का सर है इस पर हर दुपट्टा मुस्कुराता है


किताब: क्या तुम्हें याद कुछ नहीं आता

पृष्ठ संख्या: 25

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